Tuesday, December 27, 2011

"पिता की दरख्वास्त" a poem

पिता की दरख्वास्त
मेरे बेटे मेरी दरख्वास्त है, उम्र जो ढले,
मुझे तनहा न रखना, खुद से जुदा न करना.

तेरी छत बन तुझे महफूज़ रखा ज़िन्दगी भर,
आखिरी सांस ले के तुझको छोड़ जाऊंगा,
तुझे ऊपर से निहारूंगा एक हसरत से,
क्या तुझे फिर से गोद ले के चूम पाउँगा,
आखिरी वक़्त में तू मुझसे बस लिपट जाना,
मेरा सिर गोद में टिका के मुझको सहलाना,
मेरी आँखें तुझे ही देखें सबसे आखिर तक,
जो लगें मुंदने मुझे छोड़ चले मत जाना,
मेरे बच्चे तू मुझे ऐसे बिदा न करना,
मुझे तनहा न रखना, खुद से जुदा न करना.
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