Monday, March 19, 2012

...तो बात बने (Poem)

...तो बात बने (Poem)
कवि: डॉ कृष्ण एन० शर्मा 

एक वक़्त का पूजा-कलमा, साथ करें तो बात बने.
हाथ पकड़ चल साथ तो देखें, मज़हब की दीवार कहाँ.

अमन की चूल खोदने वाले, छुपे कहीं अंधियारों में.
जला मशालें, बजा नगाड़े, चल ढूढें गद्दार कहाँ.

दफा करें चल मिलकर उनको, खुदा की नेमत धरती से.
मैं रौदूँ, तू चीर दे छाती, उनकी है दरकार कहाँ.

चल न भाई तू भी ला, मई भी लाऊं जो दिल बिछड़े.
चल ढूढें जो दिलों को जोड़े, वह धागा-वह तार कहाँ.
***

कवि: डॉ कृष्ण एन० शर्मा 
ई-मेल : dr.krisharma@gmail.com
संपर्क : 9320699167