Friday, July 20, 2012

प्यारे भर हैं (Poetry) by Dr. Krishna N. Sharma

प्यारे भर हैं
शायर- डॉ. कृष्ण एन. शर्मा



ये सब मीठे-मीठे लोग, बस दिखने में प्यारे भर हैं,
इनसे बच के रहना, ये बस नाम के हमारे भर हैं.

हर रोज़ छत पर रात में, दीदार करना छोड़ दो,
कब टूट जायें क्या पता, ये बस सितारे भर हैं.

हम धीरे से भी घुड़क दें, तो उठ जायें ये मजलिसें,
ये लोग..., लोग थोड़े हैं, बस क़तारें भर हैं.

जिस रोज़ हम दो लात धर दें, भरभरा के ढह पड़ें,
ये बंदिशें कुछ नहीं, बस दीवारें भर हैं.

शायर- डॉ. कृष्ण एन. शर्मा
वेबसाइट- http:// www.krishna.info.ms
ईमेल- dr.krisharma@gmail.com
संपर्क- +91-9320699167, 9305835734