Monday, September 3, 2012

ये पड़ोस में जो आया है...


ये पड़ोस में जो आया है...
डॉ . कृष्ण एन. शर्मा

ये पड़ोस में जो आया है, मेहमान अच्छा है.
किसी बुत से तो, इस हुस्न पर ईमान अच्छा है,
हमें खूब मालूम है, हमारा हो नहीं सकता,
पर सेंकने को आँख, ये सामान अच्छा है.

समझाया यारों ने की ये अरमान खोटे हैं,
पूरे ये सब अरमान बस ख्वाबों में होते हैं.
सचमुच में मिल पाने की हसरत भाड़ में जाये
ख्वाबों में भी मिलवादे तो अरमान अच्छा है.
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