Thursday, June 20, 2013

अभी बरसात बाकी है

जो ढलके थे वो आँसू थे, अभी जज़्बात बाकी हैं।
ये तो बस चंद बूँदें थी, अभी बरसात बाकी है।।

                                   - डॉ० कृष्ण एन० शर्मा

Wednesday, June 12, 2013

ऐसी की तैसी

होती हैं बातें अपनी सबके दरमियाँ कैसी?!
कौन-कौन करता है बातें कहाँ-कहाँ कैसी?!
किस-किस की जुबान खैन्चें, किसको समझाएं?!
छोड़ दिया दिल पे ही लेना, ऐसी की तैसी।

छोटी-छोटी बातों पे भी जलजला आ जाता है,
चार लोग मिलते हैं और फैसला आ जाता है,
ऐसे किसी फैसले को भाव क्यों दें,
जिसमें ना मुकदमा, न कचहरी, न कोई पेशी!

- डॉ० कृष्ण एन० शर्मा

Monday, June 10, 2013

Sunday, June 9, 2013

'बड़े अजीब हैं ये' - Dr. Krishna N. Sharma

बड़े अजीब हैं ये मुझसे ख़ार खाते हैं,
खुद ही जलते हैं खुद ही ख़ाक में मिल जाते हैं।
मुझे लगता है ये परवाने हैं तरक्की के,
जहाँ भी देखते हैं खुद ही खींचे आते हैं।
                                                      -डॉ० कृष्ण एन० शर्मा