Saturday, July 20, 2013

कुछ ग़लतियाँ

एक ताज़ा ख्याल पेश-ए-ख़िदमत है (क्या करें आजकल तो टेंशन में भी शेर आते हैं). 
इन दूरियों के बढ़ने से बेहतर है हम ये मान लें,
कुछ ग़लतियाँ तुमसे हुईं, कुछ ग़लतियाँ हमसे हुईं।

- Dr. Krishna N. Sharma